रविवार, 6 जून 2021

संघर्ष, संकल्प और संन्यास - ओशो

Conflict-Resolution-and-Retirement-Osho


प्यारी मधु, 

    प्रेम। 

            संघर्ष का शुभारंभ है। और, उसमें तुझे धक्का देकर मैं अत्यंत आनंदित हूं। संन्यास संसार को चूनौती है। वह स्वतंत्रता की मौलिक घोषणा है। पल-पल स्वतंत्रता में जीना ही संन्यास है। असुरक्षा अव सदा तेरे साथ होगी; लेकिन वही जीवन का सत्य है। सुरक्षा कहीं है नहीं-सिवाय मृत्यु के। जीवन सुरक्षा है। और यही उसकी पुलक है-यही उसका सौंदर्य है। सुरक्षा की खोल ही आत्मघात है। वह अपने ही हाथों, जीते जी करना है। ऐसे मूर्दे चारों ओर है! उन्होंने ही संसार को मरघट बना दिया है। उनमें प्रतिष्ठित मुर्दे भी हैं। इन सबकी जगाना है, हालांकि वे सब जागे हुओं को भी भुलाने की चेष्टा करते हैं। अब तो यह संघर्ष चलता ही रहेगा। इसमें ही तेरे संपूर्ण संकल्प का जन्म होगा। और मैं देख रहा हूं दूर-उस किनारे को जो कि तेरे संघर्ष की मंजिल है। 

रजनीश के प्रणाम 

२५-१९७० प्रति : मा आनंद मधु, संस्कार तीर्थ, आजोल, गुजरात