रविवार, 14 मार्च 2021

जिन खोया तिन पाइयां - ओशो

Gin-Khoya-Tin-Piyan-Osho


मेरे प्रिय, 

    प्रेम। 

        सत्य कहां है? खोजो मत। खोजने से सत्य मिला ही कब है? क्योंकि, खोजने में खोजने वाला जो मौजूद है। इसलिए, खोजो मत-खो जाओ। जो स्वयं मिट जाता है, वह सत्य को पा लेता है। मैं नहीं कहता, जिन खोजा तिन पाइयां। मैं कहता हूं, जिन खोया तिन पाइयां। 


रजनीश के प्रणाम
१-८-१९६९ प्रति : स्वामी क्रियानंद, बंबई