रविवार, 7 फ़रवरी 2021

सत्य को जीतने की कला : सब भांति हार जाना - ओशो

The-Art-of-Winning-the-Truth-Losing-Everything-Like-it-Osho


मेरे प्रिय, प्रेम।

        जल्दी न करें। कभी-कभी जल्दी ही देरी बन जाती है। प्यास के साथ प्रतीक्षा भी जोड़ें। जितनी गहरी प्रतीक्षा हो, उतनी ही शीघ्रता होती है। बीज बो दिया है, अब छाया में बैठे और देखें कि क्या होता है। वीज टूटेगा, अंकुर भी बनेगा, लेकिन जल्दी तो नहीं की जा सकती है। प्रत्येक बात के लिए समय भी तो चाहिए न? श्रम करें जरूर लेकिन फल परमात्मा पर छोड़ दें। जीवन में कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता है। और सत्य की ओर उठाया हुआ कदम तो कभी भी नहीं। लेकिन कभी-कभी अधैर्य ज रूर वाधा बन जाता है। प्यास के साथ वह आता भी है। लेकिन, प्यास को बचा लें और उसे विदा दे दें। प्यास और अधैर्य को एक समझने की भूल न करें। प्यास में खोज है लेकिन दौड़ नहीं है। 

        अधैर्य में दौड़ है लेकिन खोज नहीं है। प्यास में बाट है लेकिन मांग नहीं। अधैर्य में मांग है लेकिन बाट नहीं। प्यास में शांत रुदन है। अधैर्य मग अशांत छीना झपटी है। और सत्य के लिए आक्रमण नहीं किया जा सकता है। वह मिलता है, लड़ने से नहीं, हारने से। उसे जीतने की कला वस भांति हार जाना ही है। मधु को प्रेम। 


रजनीश के प्रणाम
११-४-७० प्रति : श्री वावूभाई शाह, संस्कार तीर्थ, आजोल, गुजरात