गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

खोज-खोज-और खोज - ओशो

Search-search-and-search-osho


प्यारी कुसुम, प्रेम। 

        खोज-खोज-और खोज। इतना कि अंततः खोजते-खोजते स्वयं ही खो जावें।बस वही बिंदु उसके मिलन का है। इधर मैं मिटा, उधर वह हुआ। मैं के अतिरिक्त और कोई दीवार न कभी थी, न है। कपिल को प्रेम। असंग को आशीष। 


रजनीश के प्रणाम
८-४-७०