बुधवार, 6 जनवरी 2021

जहां प्यास है वहां मार्ग भी है - ओशो

Where-there-is-thirst,-there-is-also-a-route-Osho


प्रिय शिरीष, प्रेम। 

        प्रभु के लिए ऐसी प्यास से आनंदित हूं। सौभाग्य से ही ऐसी प्यास होती है और जहां प्यास है वहां मार्ग भी है। वस्तुतः तो प्रगाढ़ अभीप्सा ही मार्ग बन जाती है। पर मात्मा तो प्रतिक्षण ही पुकार रहा है किंतु हमारे हृदय के तार ही सोए हों तो वे प्री तध्वनित नहीं हो पाते हैं। आंखें हम बंद किए हों तो सूर्य के द्वार पर खड़े होते हुए भी अंधकार ही होगा। सूर्य सदा ही द्वार पर है और उसे पाने को बस आंख खोलने से ज्यादा और कुछ भी नहीं करना है। ...प्रभू प्रकाश दे यही मेरी कामना है। मैं और मेरा प्रेम सदा साथ है परिवार में सभी को प्रणाम कहें। बच्चों को स्नेह । 


रजनीश के प्रणाम
११-३-१९६६ प्रति : सुश्री शिरीष पै, बंबई