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    सिद्धार्थ उपनिषद Page 164

    सिद्धार्थ उपनिषद Page 164

    (451)

               " ना हम हिंदू , मुस्लिम , सिख हैं , ना ईसाईयत की बातें करते हैं .
                  बेटे आदम के मनु वंशी हैं , आदमियत की बातें करते हैं .
                  फिरका , मज़हब , जात मिटाकर , आदमियत का राज बतलाने को
                  हम सूफी प्यार मोहब्बत से , रूहानियत की बातें करते हैं . "


    सूफी बाबा शाह कलंदर की भूमिका बहुत बड़ी है . तुमने देखा यहां ' कलंदर कुटीर ' , मेरी इच्छा थी कि उनकी याद में कुछ बनाया जाए . हर गुरूवार को उनकी याद में हम दरबार करते हैं . तुमको एक राज बताऊँ कि एक  बार  मैंने बाबा से कहा मुझे दो-तीन लाइनों में बताएं कि ' सूफीज्म ' क्या है ? बाबा ने दो पंक्तियाँ कहीं -

      "अल्लाह के बन्दों से मुझे बैर नही है ,
       यानी मेरी दुनियां में कोई गैर नहीं है . "

    मैंने बाबा से कहा पाकिस्तान को अपना मानने में मुझे बड़ी दिक्कत हो जाती है . बाबा ने कहा वो तो तुम्हें मानना ही पड़ेगा कि कोई गैर नहीं है , किसी से बैर नहीं है . और एक दिन तुमको शायद यह जिम्मेवारी उठानी पड़े कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के लिए कुछ करना पड़े .

    जनवरी में जब उन्होंने मुझे " औलिया-पद " दिया तो साथ-साथ जिम्मेवारी भी दी कि इस प्रायद्वीप में , इस महाद्वीप में शान्ति और सौहाद्र का वातावरण बने . जिम्मेवारी बहुत बड़ी थी . मैंने कहा बाबा ये तो बड़ा मुश्किल काम लगता है , क्योंकि ' नुक्लियर एक्सप्लोजन ' के ढेर पर सब खड़े हैं , ऐसे में शान्ति और सौहाद्र की बात करना ; उन्होंने बहुत अद्भुत बात कही , कहा कि तुम अकेले थोड़े हो बहुत से लोग हैं  जो तुम्हारी मदद करेंगे , फिर काम शुरू हुआ तुम जानते हो सूफी-दरबार में सब लोग दुआ करते हैं कि सबकोंटिनेंटल में शान्ति और सौहाद्र हो . और नज़ारा तुम्हारे सामने है , हिन्दुस्तान की तस्वीर बदल गई , नया प्रशासन आ गया . और पाकिस्तान से शरीफ साहब पहुंच गए और अब हवा बदली-बदली सी है . इतनी हवा बदली है कि अब शरीफ साहब की पुत्री मोदी साहब की फैन है , शरीफ साहब की मां मोदी साहब की फैन है . अब ये देख रहे हो ऐसा कल्पना कर सकते थे , ऐसी बात हो सकती थी . मगर मैं इस  बात को जानता हूं कि इसमें अपने प्यारे , प्यारे सूफी बाबा का हाथ है
     
    सूफी बाबा हमारे दिलों में हैं . हमारी पूरी जीवन शैली में हैं . हिन्दुस्तान और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के मंगल में न केवल वे बल्कि उनके साथ सूफियों का पूरा मिस्टिक ग्रुप है जो मदद कर रहा है .
     
    तो निश्चित रूप से उनका जो कंट्रीब्यूशन है , उनका जो योगदान है , कभी भी इतिहास में लिखा नहीं जाएगा . कभी भी इतिहास के पन्नों में उनकी भूमिका दर्ज नही होगी , लेकिन केवल मिस्टिक जानेंगे उनके  कंट्रीब्यूशन को , क्योंकि उनका जो कंट्रीब्यूशन है वो इतना अनूठा है कि हजारों साल तक मानवता उनकी ऋणी रहेगी .


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