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    सिद्धार्थ उपनिषद Page 139

    सिद्धार्थ उपनिषद Page 139

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    राग क्या है ? संसार में रूचि , संसार में रस राग है . वैराग्य  क्या है ? संसार में अरुचि , संसार के प्रति विरस हो जाना वैराग्य है . वीतराग क्या है ? स्वयं में रूचि , स्वयं में रस वीतराग है . संसारी अधिकतर राग में जीता है . साधक अधिकतर वैराग्य में जीता है . संत अधिकतर वीतराग में जीता है .

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    साधना के तीन आयाम हैं -- श्रवण , मनन और निदिध्यासन . श्रवण का अर्थ है गुरु उपदेश ध्यान से सुनना . मनन का अर्थ है उस पर मनन करना . चिंतन और मनन में अंतर है . जानकारी के आधार पर सोच-विचार चिंतन है . अनुभव के आधार पर सोच-विचार मनन है . मनन से बात ज्यादा समझ में आती है . नई रोशनी मिलती है . नई दिशा मिलती है . उपयुक्त समझ पैदा होती है .  निदिध्यासन का अर्थ है साधना , अभ्यास .

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    निदिध्यासन के चार मुख्य आयाम हैं-- ध्यान , साक्षी , समाधि और सुमिरन . निराकार के प्रति जागना ध्यान है . अपनी चिन्मय आत्मा एं संसार के प्रति जागना साक्षी है . अंतराकाश में लीन हो जाना समाधि है . आत्मा एवं परमात्मा के प्रति जागना सुमिरन है


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