गुरुवार, 18 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 72

[ "भाव करो कि ब्रह्मांड एक पारदर्शी शाश्वत उपस्थिति है ." ]


सर्वत्र प्रकाश है ; अनेक-अनेक रूपों और रंगों में प्रकाश सर्वत्र व्याप्त है . उसे देखो . सर्वत्र प्रकाश है , क्योंकि सारी सृष्टि प्रकाश की आधारशिला पर खड़ी है . एक पत्ते को देखो , एक फूल को देखो या एक पत्थर को देखो , और देर-अबेर तुम्हें अनुभव होगा कि उससे प्रकाश की किरणें निकल रही हैं . बस , धैर्य से प्रतीक्षा करो . जल्दबाजी मत करो , क्योंकि जल्दबाजी में कुछ भी प्रकट नहीं होता है . तुम जब जल्दी में होते हो तो तुम जड़ हो जाते हो . किसी भी चीज के साथ धीरज से प्रतीक्षा करो , और तुम्हें एक अद्भुत तथ्य से साक्षात्कार होगा  जो सदा से मौजूद था , लेकिन जिसके प्रति तुम सजग नहीं थे , सावचेत नहीं थे . और जैसे ही तुम्हें इस शाश्वत अस्तित्व की उपस्थिति अनुभव होगी वैसे ही तुम्हारा चित्त बिलकुल मौन और शांत हो जाएगा . तुम तब उसके एक अंश भर होगे ; किसी अद्भुत संगीत में एक स्वर भर ! फिर कोई चिंता नहीं है , फिर कोई तनाव नहीं है . बूँद समुद्र में गिर गई , खो गई . लेकिन आरंभ में एक बड़ी कल्पना की जरुरत होगी . और अगर तुम संवेदनशीलता बढ़ाने के अन्य प्रयोग भी करते हो , तो वह सहयोगी होगा . तुम कई तरह के प्रयोग कर सकते हो . किसी का हाथ अपने हाथ में ले लो और दूसरे के भीतर अपने जीवन को महसूस करो ; उसे महसूस करो और उसे अपनी ओर बहने दो , गति करने दो . फिर अपने जीवन को महसूस करो , और उसे दूसरे की ओर प्रवाहित होने दो . किसी वृक्ष के निकट बैठ जाओ और उसकी छल को छुओ , स्पर्श करो . अपनी आंखें बंद कर लो और वृक्ष में उठते जीवन-तत्व को अनुभव करो . और तुम्हें तुरंत बदलाहट अनुभव होगी .


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