गुरुवार, 18 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 98

[ " किसी सरल मुद्रा में दोनों काँखों के मध्य-क्षेत्र (वक्षस्थल) में धीरे-धीरे शान्ति व्याप्त होने दो . " ]


बस अपनी आंखें बंद कर लो और सारे शरीर को अनुभव करो . पैरों से शुरू करो , महसूस करो कि उनमें कहीं तनाव तो नहीं है . यदि तुम्हें लगे कि कोई तनाव है तो एक काम करो : उसे और तनाव से भर दो . यदि तुम्हें लगे कि दाहिने पांव में तनाव है तो उस तनाव को जितना सघन कर सको , उतना सघन करो . उसे एक शिखर तक ले आओ , फिर अचानक उसे ढीला छोड़ दो , ताकि तुम यह महसूस कर सको कि कैसे वहां विश्राम उतर रहा है . फिर पूरे शरीर में देखते जाओ कि कहां-कहां तनाव है उसे और गहराओ , क्योंकि तनाव सघन हो तो विश्राम में जाना सरल है . आधे-अधूरे तो यह बड़ा कठिन है , क्योंकि तुम उसे महसूस ही नहीं कर सकते . एक अति से दूसरी अति पर जाना बहुत सरल है , क्योंकि एक अति स्वयं ही दूसरी अति पर जाने के लिए परिस्थिति पैदा कर देती है .
       तो चेहरे पर अगर तुम कोई तनाव महसूस करो तो चेहरे की मांश-पेशियों को जितना खींच सको खींचों , तनाव को एक शिखर पर पहुंचा दो . उसे ऐसे बिदु तक ले जाओ जहां और तनाव संभव ही न हो , फिर अचानक ढीला छोड़ दो . इस तरह से देखो कि शरीर के सभी अंग विश्रांत हो जाएं . और चेहरे की मांश-पेशियों पर विशेष ध्यान दो , क्योंकि वे तुम्हारे नब्बे प्रतिशत तनावों को ढोती हैं , बाक़ी शरीर में केवल दस प्रतिशत तनाव हैं . सब तनाव तुम्हारे मस्तिष्क में होते हैं , इसलिए तुम्हारा चेहरा उनका भण्डार बन जाता है . तो अपने चेहरे पर जितना तनाव डाल सको डालो , शरमाओं मत . चेहरे को पूरी तरह से संतापयुक्त , विषादयुक्त बना डालो , और फिर अचानक ढीला छोड़ दो . पांच मिनट के लिए ऐसा करो , ताकि तुम्हारे शरीर का हर अंग विश्रांत हो जाए . यह तुम्हारे लिए बड़ी सरल मुद्रा है . तुम इसे बैठकर , या बिस्तर में लेटे हुए , या जैसे भी तुम्हें आसान लगे कर सकते हो .


Page - प्रस्तावना 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25
26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50
51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75
76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100
101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112