सोमवार, 22 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 40

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 40

["किसी भी अक्षर के उच्चारण के आरम्भ में और उसके क्रमिक परिष्कार में , निर्ध्वनि में जागो ."]


किसी ध्वनि , किसी अक्षर के साथ प्रयोग करो . उदाहरण के लिए , ओम् के साथ ही प्रयोग करो . उसके आरम्भ में ही जागो , जब तुमने ध्वनि निर्मित नहीं की है ; या जब ध्वनि निर्ध्वनी में प्रवेश करे , तब जागो . यह कैसे करोगे ? किसी मंदिर में चले जाओ . वहां घंटा होगा या घंटी होगी . घंटे को हाथ में ले ल और रुको . पहले पूरी तरह से सजग हो जाओ . ध्वनि होने वाली है और तुम्हें उसका आरम्भ नहीं चूकना है . पहले तो समग्ररूपेंण सजग हो जाओ--मानो इस पर ही तुम्हारी जिंदगी निर्भर है . ऐसा समझो कि अभी कोई तुम्हारी हत्या करने जा रहा है और तुम्हें सावधान रहना है . ऐसे सावधान रहो--मानो कि यह तुम्हारी मृत्यु बनने वाली है . और यदि तुम्हारे मन में कोई विचार चल रहा हो तो अभी रुको ; क्योंकि विचार नींद है . विचार के रहते तुम सजग नहीं हो सकते . और जब तुम सजग होते हो तो विचार नहीं रहता है . रुको . जब लगे कि अब मन निर्विचार हो गया , कि अब मन में कोई बादल न रहा , कि अब मैं जागरूक हूं , तब ध्वनि के साथ गति करो . पहले जब ध्वनि नहीं है , तब उस पर ध्यान दो . और फिर आंखें बंद कर लो . और जब ध्वनि हो , घंटा बजे , तब ध्वनि के साथ गति करो . ध्वनि धीमी से धीमी , सूक्ष्म से सूक्ष्म होती जायेगी और फिर खो जायेगी . इस ध्वनि के साथ यात्रा करो . सजग और सावधान रहो . ध्वनि के साथ उसके अंत तक यात्रा करो ; उसके दोनों छोरों को , आरम्भ और अंत को देखो .

       पहले किसी बाहरी ध्वनि के साथ , घंटा या घंटी के साथ प्रयोग करो . फिर आंख बंद करके भीतर किसी अक्षर का , ओम्  या किसी अन्य अक्षर का उच्चार करो . उसके साथ भी वही प्रयोग करो . यह कठिन होगा . इसीलिए हम पहले बाहर की ध्वनि के साथ प्रयोग करते हैं . जब बाहर करने में सक्षम हो जाओगे तो भीतर करना भी आसान होगा . तब भीतर करो . उस क्षण की प्रतीक्षा करो जब मन खाली हो जाए . और फिर भीतर ध्वनि निर्मित करो , उसके साथ गति करो , जब तक वह बिलकुल न खो जाए . इस प्रयोग को करने में समय लगेगा . कुछ महीने लग जाएंगे , कम से कम तीन महीने . तीन महीने में तुम बहत ज्यादा सजग हो जाओगे , अधिकाधिक जागरूक हूँ जाओगे . ध्वनि-पूर्व अवस्था और धवन के बाद की अवस्था का निरिक्षण करना है ; कुछ भी नहीं चूकना है . और जब तुम इतने सजग हो जाओगे कि ध्वनि के आदि और अंत को देख सको तो इस प्रक्रिया के द्वारा तुम बिलकुल भिन्न व्यक्ति हो जाओगे .


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