सोमवार, 22 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 39

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 39

["ओम् जैसी किसी ध्वनि का मंद-मंद उच्चारण करो ."]


ओम् ध्वनि का उच्चार करो , और फिर धीरे-धीरे उस ध्वनि के साथ लयबद्ध अनुभव करो . जब ओम् का उच्चार करो तो उससे भर जाओ . और सब कुछ भूलकर ओम् ही बन जाओ . और ध्वनि बन जाना बहुत आसान है ; क्योंकि ध्वनि तुम्हारे शरीर में , तुम्हारे मन में , तुम्हारे समूचे स्नायु संस्थान में गूंजने लग सकती है . ओम् की अनुगूंज को अनुभव करो . उसका उच्चार करो और अनुभव करो कि तुम्हारा सारा शरीर उससे भर गया है , शरीर का प्रत्येक कोष उससे भर गया है , शरीर का प्रत्येक कोष उससे गूँज उठा है . उच्चार करना लयबद्ध होना भी है . ध्वनि के साथ लयबद्ध होओ ; ध्वनि ही बन जाओ . और तब तुम अपने और ध्वनि के बीच गहरी लयबद्धता अनुभव करोगे ; तब तुममें उसके लिए गहरा अनुराग पैदा होगा . यह ओम् की ध्वनि इतनी सुंदर और संगीतमय है ! जितना ही तुम उसका उच्चार करोगे उतने ही तुम उसकी सूक्ष्म मिठास से भर जाओगे . ऐसी ध्वनियां हैं जो बहुत तीखीं हैं और ऐसी ध्वनियां हैं जो बहुत मीठी हैं . ओम् बहुत मीठी ध्वनि है और शुद्धतम ध्वनि है . उसका उच्चार करो और उससे भर जाओ .

     जब तुम ओम् के साथ लयबद्ध अनुभव करने लगोगे तो तुम उसका जोर से उच्चार करना छोड़ सकते हो . फिर ओंठों को बंद कर लो और भीतर ही भीतर उच्चार करो . लेकिन यह भीतरी उच्चार पहले जोर से करना है . शुरू में यह भीतरी उच्चार भी जोर से करना है , ताकि ध्वनि तुम्हारे समूचे शरीर में  फ़ैल जाए , उसके हरेक हिस्से को , एक-एक कोशिका को छुए . उससे तुम नव जीवन प्राप्त करोगे ; वह तुम्हें फिर से युवा और शक्तिशाली बना देगा .


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