सोमवार, 22 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 26

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 26

[" जब कोई कामना उठे , उस पर विमर्श करो . फिर , अचानक , उसे छोड़ दो ."]


तुम्हें कोई इच्छा होती है-- चाहे वह कामवासना हो , चाहे प्रेम की इच्छा हो , चाहे भोजन की इच्छा हो . तुम्हें इच्छा होती है तो उस पर विमर्श करो . जब यह सूत्र कहता है कि विमर्श करो तो उसका मतलब होता है कि उसके पक्ष या विपक्ष में विचार मत करो , बल्कि देखो कि वह इच्छा क्या है . मन में कामवासना पैदा होती है और तुम कहते हो कि यह बुरी है . यह विमर्श करना नहीं हुआ . तुम्हें सिखाया गया है कि कामवासना बुरी है . इसलिए उसे बुरा कहना विमर्श नहीं है . तुम शास्त्रों से पूछ रहे हो . तुम अतीत से पूछ रहे हो . तुम गुरुओं और ऋषियों से पूछ रहे हो . तुम स्वयं कामना पर विमर्श नहीं कर रहे हो . तुम किसी और चीज पर विमर्श कर रहे हो . हो सकता है , वह तुम्हारा संस्कार हो , तुम्हारे पालन-पोषण की शैली हो , तुम्हारी शिक्षा हो . तुम्हारी संस्कृति हो , तुम्हारा धर्म हो . तुम उन पर विचार कर रहे हो , कामना पर विमर्श नहीं . समझो कि कामवासना है और तुम उसके पक्ष या विपक्ष में नहीं हो , उसके संबंध में तुम्हारी कोई धारणा नहीं है , तुम सिर्फ उसे देख रहे हो . तो इस देखने भर से तुम्हारा पूरा अस्तित्व उस कामना में संलग्न हो जायेगा . एक अकेली कामवासना आग की लपट बन जायेगी . उस लपट में तुम्हारा सारा अस्तित्व जलने लगेगा-- मानो कि तुम समग्ररूपेण कामुक हो उठे हो . तब कामवासना काम-केन्द्र पर ही सीमित नहीं रहेगी , वह तुम्हारे पूरे शरीर पर फ़ैल जायेगी , तुम्हारे शरीर का एक-एक तंतु कांपने लगेगा . कामना अंगार बन जायेगी ; तब उसे छोड़ दो , उससे अचानक हट जाओ . उससे लड़ो मत , इतना ही कहो कि मैं छोड़ता हूँ . तब क्या होगा ? ज्यों ही तुम कहते हो कि मैं छोड़ता हूँ , एक अलगाव घटित होता है . तुम्हारा शरीर , कामोत्तप्त शरीर और तुम दो हो जाते हो . अचानक एक क्षण को भीतर उनके बीच जमीन-आसमान की दूरी पैदा हो गई . शरीर तो आवेग से , कामवासना से उद्वेलित है और केन्द्र शांत है , मात्र देख रहा है . स्मरण रहे , वहां कोई संघर्ष नहीं है , सिर्फ अलगाव है . संघर्ष में तुम अलग नहीं होते , जब तुम लड़ते हो , तुम लड़ाई के विषय के साथ एक होते हो . तुम जब मात्र छोड़ देते हो तब तुम अलग होते हो , तब तुम इसे देख सकते हो -- मानो तुम नहीं , कोई दूसरा देख रहा है .


Page - प्रस्तावना 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25
26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50
51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75
76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100
101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112