गुरुवार, 18 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 95

[ " अनुभव करो कि सृजन के शुद्ध गुण तुम्हारे स्तनों में प्रवेश करके सूक्ष्म रूप धारण कर रहे हैं . " ]


विश्रामपूर्ण हो जाओ . स्तनों में प्रवेश करो और अपने स्तनों को ही अपना पूरा अस्तित्व हो जाने दो . पूरे शरीर को स्तनों के होने के लिए मात्र एक परिस्थिति बन जाने दो , तुम्हारा पूरा शरीर गौण हो जाए . और तुम उनमें ही विश्राम को , प्रवेश करो . तब तुम्हारी सृजनात्मकता जगेगी . स्त्रैण सृजनात्मकता तभी जगती है जब स्तन सक्रिय हो जाते हैं . स्तनों में डूब जाओ , और तुम्हें अनुभव होगा कि तुम्हारी सृजनात्मकता जाग रही है .
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