सोमवार, 22 सितंबर 2014

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 12

विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 12

( " जब किसी बिस्तर या आसन पर हो तो अपने को वजनशून्य हो जाने दो -- मन के पार ." )



वजनशून्य होने के लिए सिद्धासन सर्वश्रेष्ठ आसन है . पांवों और हाथों को बांधकर सिद्धासन में बैठना ज्यादा कारगर होता है , क्योंकि तब तुम्हारी आंतरिक विद्युत एक वर्तुल बन जाती है . रीढ़ सीधी रखो . अब तुम समझ सकते हो कि सीधी रीढ़ रखने पर इतना जोर क्यों दिया जाता है . क्योंकि सीधी रीढ़ से कम से कम जगह घेरी जाती है . तब गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कम रहता है . आँखें बंद रखते हुए अपने को पूरी तरह संतुलित कर लो , अपने को केंद्रित कर लो . पहले दांयी ओर झुककर गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करो , फिर बांयी ओर झुककर गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करो , आगे को झुककर भी गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करो . तब उस केन्द्र को खोजो जहाँ गुरुत्वाकर्षण या वजन कम से कम अनुभव होता है . और उस स्थिति में थिर हो जाओ .तब शरीर को भूल जाओ और भाव करो कि तुम वजन नहीं हो , तुम वजनशून्य हो . फिर इस वजनशून्यता  का अनुभव करते रहो . अचानक तुम वजन शून्य हो जाते हो ; अचानक तुम शरीर नहीं रह जाते हो .


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